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नगरपालिकाओ का गठन और शासन EO/RO PART-B NOTES HINDI

                           नगरपालिकाओ का गठन और शासन 

                             धारा- 3 नगरपालिका का परिसीमन 

● राज्य सरकार गजट अधिसूचना द्वारा निम्न कार्य कर सकती है-

(A)–  किसी भी क्षेत्र को नगरपालिका घोषित करना।-  नगरपालिका में नये क्षेत्रों को शामिल करना।-  नये क्षेत्रों हेतु 6 महीनें में चुनाव कराना आवश्यक है।
(B)–  नगरपालिका से किसी क्षेत्र को बाहर करना एवं संबंधित सदस्य को हटाना।
(C)–  दो नगरपालिका क्षेत्रों को मिलाना।-  अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य को उस नगरपालिका सदस्य के रूप में माना जाएगा, जिसे समामेलन किया गया है।
(D)– नगरपालिका का विभाजन करना।- विभजित क्षेत्र के सदस्यों को नई नगरपालिका क्षेत्र के सदस्य के रूप में माना जाएगा।
(E)– नगरपालिका का समापन (भंग)।

v नगरपालिका क्षेत्र का स्थानांतरण-

यदि नगरपालिका का अस्तित्व समाप्त हो जाए तो धन एवं संपत्ति राज्य सरकार की हो जाएगी।

यदि नगरपालिका अन्य स्थानीय प्राधिकरण क्षेत्र में आती है तो धन एवं संपत्ति स्थानीय प्राधिकरण की हो जाएगी।

यदि एक नगरपालिका का क्षेत्र अन्य नगरपालिका को स्थानांतरित किया जाता है तो आनुपातिक निधि, आस्तियाँ, दायित्व हस्तांतरित होंगे।

यदि कोई क्षेत्र दो नगरपालिका में आता है तो राज्य सरकार अंतिम स्थिति स्पष्ट करेगी।

v नगरपालिका में ग्राम क्षेत्र का स्थानांतरण-

राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा किसी ग्राम पंचायत को नगरपालिका क्षेत्र में शामिल कर सकती है।

  इसके तहत पंचायत के अधिकार समाप्त हो जाएंगे, लेकिन पंच एवं सरपंच नगरपालिका के अतिरिक्त सदस्य समझें जाएंगे (अगले आम चुनाव तक)।

संपत्ति एवं देनदारियाँ नगरपालिका को हस्तान्तरित (ट्रांसफर) कर दी जाएगी।

कर वसूलने का अधिकार नगरपालिका को दिए जाएगा।  

धारा- 4

नगरपालिका बोर्ड अधिनियम के ऐसे उपबन्धों के प्रवर्तन से छूट देने की शक्ति जो उसके लिए अनुपयुक्त हों

(Power to exempt Municipal Board from operation of any provisions of the Act unsuited thereto)

इस एक्ट का कोई उपबंध जो नगरपालिका बोर्ड के लिए उपयुक्त ना हो तो राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा छूट दे सकती है या सुसंगत नियम बना सकती है।

धारा- 5

नगरपालिका की स्थापना और निगमन

(Establishment and incorporation of Municipality)

v राज्य सरकार गजट अधिसूचना द्वारा निम्नलिखित नगरपालिक क्षेत्रों की स्थापना कर सकती है-

क्षेत्रस्थापना
प्रत्येक संक्रमणशील क्षेत्रनगरपालिका बोर्ड
प्रत्येक लघुत्तर नगरीय क्षेत्रनगर परिषद
प्रत्येक वृहत्तर नगरीय क्षेत्रनगर निगम

 यह एक निगमित निकाय होगा।

 इसका शाश्वत उत्तराधिकार होगा।

 इसकी एक सामान्य मुहर होगी।

 इसके निगमित नाम से वाद (Case), अभियोजन चल सकेगा या उस पर वाद चलाया जा सकेगा।

राज्यपाल की इच्छा पर औद्योगिक नगरों में नगरपालिका क्षेत्रों की स्थापना नहीं की जाएगी।

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में पर्यटन महत्व के आधार पर विकास प्राधिकरण (Development Authority) की स्थापना की जाएगी। उदाहरण- जयपुर विकास प्राधिकरण।

विकास प्राधिकरण का उद्देश्य क्षेत्र का तीव्र विकास करना है, यह नगरपालिका को कवर (Cover) कर भी सकता है या नहीं कर सकता है।

धारा- 6

नगरपालिका की संरचना-

(Composition of Municipality)

नगरपालिका की सीटें (वार्डों) प्रत्यक्ष चुनाव से भरी जाएंगी।

  सदस्यों की संख्या राज्य सरकार निर्धारित करेगी (न्यूनतम सदस्य-13)

v नगरपालिका बोर्ड, नगरनिगम या नगर परिषद में प्रतिनिधित्व

 MLAMPमनोनीतनिर्वाचित
नगरपालिका बोर्ड
नगर परिषद
नगर निगम
Voting Right

● मनोनीत सदस्य- नगरपालिका का ज्ञान रखने वाले 3 व्यक्ति या निर्वाचितों की संख्या का 10 प्रतिशत जो भी कम हो।

ये सदस्य राज्य सरकार द्वारा मनोनीत होते है।

  इन सदस्यों को सरकार कभी भी वापस बुला सकती है।

राज्य सरकार जनगणना के आधार पर स्थानों की संख्या परिवर्तित कर सकती है परंतु इससे पदावधि में फर्क नहीं पड़ेगा।

● सीटों का वर्गीकरण- सामान्य, महिला, SC, ST एवं OBC के रूप में होगा।

v आरक्षण

यदि नगरपालिका की कुल जनसंख्या में एससी+एसटी का प्रतिशत 50 प्रतिशत से कम है तो वहाँ ओबीसी को 21 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा (अधिक नहीं)।

परंतु जहाँ एससी+एसटी की जनसंख्या 70 प्रतिशत से अधिक नहीं है वहाँ प्रत्येक नगरपालिका में कम से कम 1 स्थान ओबीसी का आरक्षित होगा।

एससी, एसटी और ओबीसी के आरक्षित स्थान (Reserved seats) में से आधे स्थान उन्हीं वर्गों की महिलाओं के लिए होंगे।

कुल सीटों में से आधे स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे।

संविधान के अनुच्छेद-334 की अवधि की समाप्ति पर SC, ST एवं OBC के स्थानों का आरक्षण नहीं रहेगा।

सामान्य तथा आरक्षित सभी स्थान वार्डों में प्रत्यक्ष निर्वाचन से भरे जाएंगे।

धारा- 7

पदावधि

(Term of office)

v नई नगरपालिका-

प्रथम बैठक की तारीख़ से 5 वर्ष तक बनी रहेगी।

नगरपालिका की 5 साल की समाप्ति के पूर्व उस नगरपालिका के विघटन पर गठित की गई कोई नई नगरपालिका, उस अवधि के केवल शेष भाग के लिए बनी रहेगी।

धारा- 8

नगरपालिका शासन का नगरपालिका में निहित होना

(Municipal government to vest in Municipality)

किसी नगरपालिका का नगरपालिक शासन, नगरपालिका बोर्ड, नगर परिषद एवं नगर निगम में उनके अध्यक्षों के माध्यम से निहित होगा।  

धारा- 9

वार्डों में विभाजन

(Division into wards)

नगरपालिका के निर्वाचन (चुनाव) हेतु नगरपालिका (धारा-6 के अनुसार) को कुल वार्ड सीटों की संख्या में विभाजित किया जाएगा। या कुल स्थानों की संख्या को वार्डों में विभाजित करेंगे।

वार्डों में प्रतिनिधित्व उस वार्ड की जनसंख्या के आधार पर होगा।

लगभग सभी वार्डों में जनसंख्या का अनुपात लगभग समान होगा।

धारा- 10

वार्डों का अवधारण

(Determination of wards)

v राज्य सरकार के आदेश द्वारा-

नगरपालिका का वार्डों में विभाजन निर्वाचन हेतु (संख्या) करेगी।

 वार्डों की सीमा तय करेगी।

 सीटों की संख्या तय करेगी।

 एससी, एसटी, ओबीसी एवं महिलाओं हेतु आरक्षित स्थान (Reserved seats) की संख्या तय करेगी।

 महिलाओं हेतु वार्डों की संख्या निर्धारित की जाएगी।

सरकार 7 दिनों की अवधि में आपत्तियाँ आमंत्रित करेगी और यदि आवश्यक हो तो संशोधन करेगी। (धारा-6 के अनुसार)।

एससी, एसटी, ओबीसी एवं महिलाओं की सीटों का निर्धारण चक्रानुक्रम (रोटेशन) से आवंटित किया जा सकता है। (May be alloted by Rotation)।

v वार्ड-

 एक भौगोलिक क्षेत्र है।

एससी, एसटी की सीट उस क्षेत्र में वितरित की जाएगी, जहाँ जनसंख्या तुलनात्मक रूप से अधिक हो।

 वार्ड की नम्बरिंग या संख्यांकन उत्तर-पश्चिम कोण (North-west corner) से शुरु होगी।

धारा- 11

नगरपालिका के लिए निर्वाचन

(Election to the Municipality) 

राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराएगा और निर्वाचक नामावली तैयार करवाएगा।

v आम चुनाव कब होंगे-

पाँचवें साल में अवधि की समाप्ति से पूर्व होंगे।

नगरपालिका का विघटन होने पर 6 माह के भीतर होंगे।

यदि आखिरी के 6 महीनें में नगरपालिका का विघटन होता है तो चुनाव कराना आवश्यक नहीं है।

राज्य सरकार चुनाव आयोग को कर्मचारी (Staff) उपलब्ध कराएगी।

धारा-12

राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यों का प्रत्यायोजन

(Delegation of functions of State Election Commission)

उपचुनाव आयुक्त या राज्य चुनाव आयोग के सचिव को सौंपा जा सकता है।

धारा- 13

प्रत्येक वार्ड के लिए मतदाता सूची

(Electoral Roll for every ward)

1.निवार्चक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के निर्देशन में मतदाता सूची तैयार की जाएगी।

● नोट- यह अधिकारी राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा मनोनीत होगा परन्तु परामर्श राज्य सरकार देगी। राज्य निर्वाचन आयोग इसकी (नि.र.अ.) सहायता हेतु ‘सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी’ नियुक्त करेगी।

2.प्रत्येक व्यक्ति, जो 18 वर्ष से अधिक एवं वार्ड का मामूली तौर पर निवासी हो, वह मतदाता सूची में रजिस्ट्रीकृत होने का हकदार है।

v स्पष्टीकरण-

ऐसा नहीं समझा जाएगा कि व्यक्ति वार्ड निवासी है यदि-

किसी वार्ड में घर पर कब्जा या स्वामित्व होने पर या

हॉस्पिटल, हॉटल, हॉस्टल में अतिथि के रूप में हो, या

यदि व्यक्ति अपने निवास स्थान से अस्थायी तौर पर दूर हो तो यह नहीं समझा जाएगा कि वह वार्ड का निवासी नहीं है।

सांसद एवं विधायक, जहाँ रजिस्ट्रीकृत है वहाँ से दूर होने पर यह नहीं समझा जाएगा कि वह वार्ड के निवासी नहीं है।

यदि कोई प्रश्न उठता है तो राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार समाधान होगा।

अर्हता की तारीख उस वर्ष जनवरी का प्रथम दिवस से होगा।

3.कोई भी व्यक्ति एक से अधिक वार्डों की मतदाता सूची में रजिस्ट्रीकृत होनें का हकदार नहीं है।

4.कोई भी व्यक्ति निर्वाचक या मतदाता सूची में एक से अधिक बार रजिस्ट्रीकृत किए जाने का हकदार नहीं है।

धारा- 14

मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए निरर्हताएं

(Disqualifications for registration in an electoral roll)

 कोई भी व्यक्ति वार्ड की मतदाता सूची में पंजीकृत होने के लिए निरर्हित होगा, यदि वह-

● भारत का नागरिक नहीं है।

● विकृतचित्त (अस्वस्थ दिमाग/पागल) है या जो सक्षम न्यायालय द्वारा घोषित है।

● चुनावों में भ्रष्ट आचरण का दोषी या उस समय अन्य अपराध में दोषी होने से मतदान के अयोग्य हो।

पंजीकरण के पश्चात अयोग्य होने पर मतदाता सूची से नाम तत्काल काट दिए जाता है लेकिन अयोग्यता समाप्ति पर जोड़ा जा सकता है।

धारा- 15

मिथ्या/झूठी घोषणा करना

(Making false declaration)

किसी व्यक्ति ने मतदाता सूची की तैयारी, संशोधन, सुधार में किसी प्रविष्टि का समावेश या अपवर्जन (बहिष्करण) कराया एवं इसकी लिखित घोषणा की है। यदि यह असत्य हुई तो उस व्यक्ति को 1 साल का कारावास या 2 हजार रुपए का जुर्माना (अधिकतम 5 हजार) या दोनों से दण्डनीय होगा।

धारा- 16

मुख्य निर्वाचन अधिकारी

(Chief Electoral Officer)

1.मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मनोनीत (पदाभिहित) होगा परन्तु राज्य सरकार से परामर्श आवश्यक है।

2.मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राज्य निर्वाचन आयोग के अधीन रहेगा।

3.मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा मतदाता सूची की तैयारी, पुनरीक्षण, शुद्धि का पर्यवेक्षण किया जाता है।

4.मुख्य निर्वाचन अधिकारी, इस एक्ट के अधीन सभी चुनावों के संचालन का पर्यवेक्षण कर सकता है।

धारा- 17

जिला निर्वाचन अधिकारी

(District Election Officers)

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य के प्रत्येक जिले में जिला निर्वाचन अधिकारी मनोनीत किया जाएगा, जिसमें राज्य सरकार से परामर्श लेना आवश्यक है। एक जिले में 1 से अधिक जिला निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किए जा सकते हैं एवं उनके क्षेत्रों का विभाजन किया जा सकता है।

ये मुख्य निर्वाचन अधिकारी की देखरेख में कार्य करेंगे।

● इनका मुख्य कार्यसमन्वय (Cordination) एवं पर्यवेक्षण (Superuision) का है।

● उसके अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत नगरपालिका के चुनाव से संबंधित सभी गतिविधियाँ शामिल है।

● ये राज्य निर्वाचन आयोग या मुख्य निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गया अन्य कार्य करेंगे।

धारा- 18

स्थानीय अधिकारियों आदि के कर्मचारी उपलब्ध कराना

(Staff of local authorities etc. to be made available)

स्थानीय प्राधिकरण एवं सरकारी संस्था, मुख्य निर्वाचन अधिकारी की मांग पर निम्नलिखित कार्यों के लिए स्टाफ उपलब्ध कराएगी-

(क) मतदाता सूची का निर्माण।

(ख) चुनाव संचालन।

धारा- 19

अधिकारियों और कर्मचारिवृन्द को राज्य निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर समझा जाएगा

(Officers and staff deemed to be on deputation to the State Election Commission)

कोई भी कार्य जैसे नामावली तैयार करना, चुनावों का संचालन करना आदि पर नियुक्त अधिकारी व कर्मचारियों को राज्य निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर समझा जाएगा और ये इसके नियंत्रण में ही कार्य करेंगे।

धारा- 20

मतदाता सूची (निर्वाचक नामावली) की तैयारी करने आदि से संसक्त पदीय कर्त्तव्यों का भंग

(Breach of official duty in connection with the preparation etc. of electoral rolls)

यदि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी या अन्य अधिकारी मतदाता सूची के संबंध में गलती का दोषी पाया जाता है तो उसे दण्डित किया जाएगा।

कारावास- 3 महीनें से 2 साल तक।

जुर्माना- 1 हजार से 2 हजार तक या दोनों।

सर्वप्रथम इसकी शिकायत राज्य निर्वाचन आयोग या मुख्य निर्वाचन अधिकारी या जिला निर्वाचन अधिकारी से की जाती है तत्पश्चात् ही न्यायालय हस्तक्षेप करता है।

धारा- 21

सदस्य होने के लिए योग्य व्यक्ति

(Persons qualified for being members)

न्यूनतम आयु 21 वर्ष।

घर में शौचालय हो और उसका परिवार खुले में शौच नहीं करता हो।

 नगरपालिका के किसी वार्ड के लिए निर्वाचक हो।

एससी या एसटी या ओबीसी के लिए उसी समुदाय का व्यक्ति।

महिला सीट के लिए केवल महिलाएं और एससी, एसटी, ओबीसी की महिलाओं की आरक्षित सीट के लिए उसी समुदाय की महिलाएं होंगी और अन्य सीटों के लिए कोई भी।

धारा 21A

कतिपय स्थानों पर निर्वाचन के लिए विशेष अर्हता

(Special qualification for election on certain seats)

● राज्य सरकार सीट आरक्षित कर सकती है जहाँ केवल 21 से 35 वर्ष के बीच का व्यक्ति ही चुनाव लड़ सकता है।

● आरक्षित सीटें- एससी, एसटी, ओबीसी, महिला सीटों में से अधिकतम 2 सीटें (केवल 1 सीट यदि उस श्रेणी के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 3 तक है)

● अनारक्षित सीटें – यदि ये सीटें केवल 1 से 5 तक हो सकती हैं। यदि अनारक्षित सीटें 5 से ऊपर हैं, तो प्रत्येक 5 सीटों के एक ब्लॉक के लिए 1 से अधिक सीटें आरक्षित होगी।

धारा- 22

एक से अधिक वार्ड के लिए निर्वाचन लड़ने पर निर्बन्धन

(Restriction on contesting elections for more than one ward)

● कोई भी व्यक्ति एक से अधिक सीटों पर चुनाव नहीं लड़ सकता है।

● यदि वह एक से अधिक सीटों से नामांकन दाखिल करता है तो नामांकन वापसी की अंतिम तिथि में अपरान्ह 3 बजे तक एक के अलावा सभी नामांकन वापस लेगा अन्यथा वह सभी सीटों से अयोग्य होगा।  

धारा- 23

यानों, ध्वनि विस्तारकों आदि के उपयोग पर प्रतिबंध

(Restrictions on use of vehicles, loud-speakers etc.)

● राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव अधिसूचना की तारीख से चुनाव पूरा होने तक विज्ञापन, यानों, लाउडस्पीकर, हॉर्डिग, पोस्टर, बेनर आदि पर बैन लगा सकता है। दोषी होने पर 5000 रू का जुर्माना और दण्डित व्यक्ति को नगरपालिका सदस्य चुने जाने पर 6 साल का प्रतिबन्ध लगाया जा सकता है। न्यायालय अपराध का संज्ञान केवल अधिकारी की शिकायत या राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश पर करेगा।

धारा- 24

सदस्यों के लिए साधारण अयोग्यताएं

(General disqualifications for members)

1. यदि वह किसी सक्षम न्यायालय द्वारा नैतिक अधमता (Moral turpitude) का दोषी है या किसी अन्य अपराध हेतु न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध है जिसमें 6 माह से अधिक की सजा हो।

2. उसका 5 साल या उससे अधिक कारावास से दंडनीय अपराध हेतु वाद चल रहा हो।

3. सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण किया हो (धारा-245)

4. खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के अधीन दोषी हो।

5.  CrPC, 1973 के तहत देशद्रोही का आदेश पारित किया हो और आदेश पल्टा नहीं गया हो।

6. यदि वह केन्द्रीय, राज्यीय या स्थानीय प्राधिकारी के अधीन सेवा से अवचार के कारण पदच्युत किया हो या हटाया गया हो।

7. पेशेवर व्यवसायी (Professional practioner) को अधिकारी द्वारा आदेश से उस व्यवसाय से वंचित कर दिए हो।

8. नगरपालिका में लाभ का पद धारण करता हो।

9. यदि वह धारा-35 के अधीन निर्वाचन संबंधी अपराधी हो या धारा- 29 के अधीन भ्रष्ट आचरण का दोषी हो तो उसे 6 साल की सजा होगी।

● यदि वह धारा-39 के अधीन हटाया गया, धारा-40 के अधीन दोषी और धारा- 41 के तहत 6 साल तक चुनाव नही लड़ सकता है।

10. यदि वह राजस्थान विधानसभा के निर्वाचनों लिए प्रवृत्त विधि के अधीन निरर्हित हो परंतु वह इस आधार पर अयोग्य नहीं होगा कि वह 21 से 25 वर्ष के बीच का है।

11. यदि वह केन्द्रीय, राज्यीय या स्थानीय प्राधिकरण के अधीन कोई वेतन या अंशकालिक नियुक्ति पर हो।

12. यदि वह किसी विश्वविद्यालय, निगम, निकाय, उधम, सौसायटी जो राज्य सरकार के नियंत्रण, वित्त पोषित हो से वैतनिक, अशंकालिक नियुक्ति धारण करता हो।

13. यदि वह दिवालिया हो।

14. यदि वह न्यायालय द्वारा विकृतचित्त घोषित हो।

15. यदि वह स्वयं साझेदार या परिवार का कोई सदस्य नगरपालिका से आपूर्ति, संविदा, नियोजन में अनुबंध हो। नियोजक का कर्मचारी के माध्यम से प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष कोई हिस्सा रखता हो।

16. यदि वह चुनाव में नामांकन भरते समय, नगरपालिका की ओर से वैतनिक विधि व्यवसायों के रूप में नियुक्त हो या न्यायालय में नगरपालिका के विरुद्ध केस लड़ रहा है । नगरपालिका के विरुद्ध विधि व्यवसायी के रूप में नियोजन स्वीकार करता हो।

17. यदि उसके दो से अधिक संतान हो, 27 नवम्बर, 1995 के बाद वृद्धि ना हो तो वह निरर्हित नहीं होगा।

18. यदि उसके विरुद्ध 2 साल से अधिक का नगरपालिका बकाया हो और वसूली कार्यवाही प्रारम्भ हो चुकी हो।

19. यदि उसे न्यायालय द्वारा नगरपालिका संपत्ति, निधि का दुर्विनियोग, गबन में दोषी ठहराया हो।

v परन्तु-

(1)  निर्हित अयोग्य व्यक्ति जैल से रिहा होने की तारीख से 6 साल के बाद चुनाव लड़ सकता है।

(5)  की निरर्हता, उस कालावधि की समाप्ति के पश्चात् जिसके लिए उस व्यक्ति को प्रतिभूति देने का आदेश दिए गया है, प्रवृत्त नहीं रहेगी।

(9)  की निरर्हता, या तो 6 साल बाद प्रवृत्त नही होगा या राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश के तहत उस कालवधि तक मान्य होगा।

(15)  के अधीन निरर्हता नहीं समझी जाएगी यदि वह-

 w संयुक्त स्टॉक कम्पनी में प्रबंध निदेशक या अभिकर्ता से भिन्न किसी रुप में हिस्सा रखता हो जो नगरपालिका के साथ सम्पर्क में हो। या

 w किसी स्थावर संपत्ति के किसी भी पट्‌टे या विक्रय या क्रय या करार में हित रखता हो। या

 w ऐसे समाचार पत्रों में हिस्सा रखता हो जिनमें नगरपालिका के विज्ञापन आते हो। या

 w  नगरपालिका द्वारा लिए उधार में डिबेंचर धारक हो। या

 w  वह किसी वस्तु का नियमित रूप से व्यापार करता हो, उस वस्तु को कमी का भार नगरपालिका खरीदती हो (राज्य सरकार की अनुमति से) इसमें कोई हिस्सा रखता हो। या

 w  किसी भी शासकीय वर्ष में 2 हजार तक या 5 हजार तक या इससे अधिक रकम का नगरपालिका को भाड़े पर देने या लेने में हिस्सा हो (गाड़ी-घोड़ा भाड़े पर देना) । या

 w एकल प्रसव से जन्मी जुड़वा संतानों को एक माना जाएगा।

 w  दत्तक (गोद) संतान को भी गिना जाएगा।

धारा- 25

मतदान का अधिकार

(Right to vote)

● जो मतदाता सूची में पंजीकृत है, मत देने का अधिकारी होगा परंतु वह मत नहीं देगा जो धारा- 14 के अधीन अयोग्य हो।

● एक से अधिक वार्डों में मत नहीं देगा, एक से अधिक बार मत नहीं देगा, यदि दिए तो मत शून्य (Void) होगा।

● हिरासत या जेल में बंद व्यक्ति मतदान नहीं कर सकता परंतु निवारक निरोध के तहत व्यक्ति मतदान कर सकता है।

धारा- 26

निर्वाचन में मत देनें की रीति

(Manner of voting at election)

● मत परोक्षी के माध्यम से नहीं दिए जाएंगे।

● मत बैलेट या वोटिंग मशीन द्वारा दिए जा सकता है।

● यदि मतदाता एक से अधिक को मत देता है तो सभी मत शून्य होंगे।

धारा- 27

आकस्मिक रिक्तियां किस प्रकार भरी जाएंगी

(Casual vacancy how to be filled)

● आकस्मिक रिक्ति होने पर उपनिर्वाचन (उपचुनाव) कराएं जाएंगे, जिसमें निर्वाचित सदस्य नगरपालिका की शेष अवधि के लिए होगा।

● जब निर्वाचित सदस्य की मृत्यु या पदत्याग या हटाए जाने से कोई रिक्ति होने पर, एससी या एसटी या ओबीसी वर्गों से रिक्ति होने पर इन्हीं वर्गों से भरी जाएगी।

● महिला आरक्षित सीट रिक्ति होने पर उसी वर्ग की महिला से ही भरी जाएगी।

● अगर रिक्ति अगले सामान्य चुनावों के 6 माह के अन्दर उत्पन्न हो तो सरकारी आदेश द्वारा उस पर निर्वाचन अगले सामान्य चुनावों में होगा।

धारा- 28

निर्वाचन अपराध

(Electoral offences)

1. सांसदों और विधायकों के चुनाव के लिए लागू ‘लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ के प्रावधान इन चुनावों पर भी लागू होंगे।

2. कोई उम्मीदवार रिटर्निंग ऑफिसर (Returning Officer) के समक्ष अपने शपथ पत्र में मिथ्या सूचना देता है या कोई सूचना छिपाता है तो उसे 6 महीने का कारावास और जुर्माना या दोनों से दण्डित होगा।

धारा-29

भ्रष्ट आचरण

(Corrupt practices)

v निर्वाचन में निम्न को भ्रष्ट आचरण समझा जाएगा-

1. रिश्वत (प्रत्यक्ष या परोक्षत: उद्देश्य)

● किसी व्यक्ति को निर्वाचन में जबरदस्ती उम्मीदवार खड़ा करने या ना होने या उम्मीदवारी वापिस लेने या निर्वाचन लड़ने से हटने का दवाब बनाना।

● निर्वाचन में मत देने से रोकने या उत्प्रेरित करने या (किसी निर्वाचक को)

● इनाम के रूप में हो।

 (परितोषण- धन का लेन-देन/इनाम/मनोरंजन)

2. असम्यक असर डालना-

● सामाजिक बहिष्कार।

● जाति बहार धमकी।

● देवी अप्रसाद।

● आध्यात्मिक परिनिंदा का भाजन हो जाएगा।

3. धर्म, मूलवंश, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर मत देने से रोकना।

● धार्मिक प्रतीकों का उपयोग, राष्ट्रीय प्रतीको का उपयोग, राष्ट्र ध्वज, राष्ट्रीय प्रतीक और उनकी दुहाई देना।

 परंतु इस एक्ट के अधीन उम्मीदवार को आवंटित कोई प्रतीक धार्मिक या राष्ट्रीय प्रतीक नहीं समझा जाएगा।

4. सती प्रथा या उसके कर्म का प्रचार करना, उसका गौरवान्यन करना।

5. यान या जलयान को भाड़े पर लेना भ्रष्ट नहीं है परंतु वह यांत्रिक शक्ति से संचालित ना हो।

6. उम्मीदवार निर्वाचन में निम्नलिखित अधिकारियों से सहायता नहीं ले सकता है-

 राजपत्रित अधिकारी, संघ के सशस्त्र बलों के सदस्य, पुलिस बल, आबकारी अधिकारी, राजस्व अधिकारी जैसे- पटवारी, सरकारी सेवा का वर्ग।

धारा- 30

निर्वाचन सम्बंधी मामलों में सिविल न्यायालय की अधिकारिता

(Jurisdiction of civil courts in electoral matters)

● दीवानी अदालत (सिविल कोर्ट) को निम्न पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं होगा-

● वार्डों का परिसीमन, वार्डों के लिए सीटों का आवंटन, मतदाता सूची की तैयारी या चुनाव के संचालन से संबंधित प्रश्न पर।

● इस एक्ट के अनुसार ही चुनाव याचिका प्रस्तुत की जाएगी अन्यथा नगरपालिका के चुनाव को प्रश्नगत नहीं किया जाएगा।

धारा- 31

निर्वाचन याचिका

(Election petition)

● नगरपालिका के सदस्य के रूप में किसी व्यक्ति के निर्वाचन को प्रश्नगत करने वाली कोई निर्वाचन याचिका, निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के भीतर, उस नगरपालिका क्षेत्र पर अधिकारिता रखने वाले जिला न्यायधीश के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।

●निर्वाचन याचिका निम्नलिखित में से एक या अधिक आधारों पर प्रस्तुत की जा सकेगी-

● निर्वाचित उम्मीदवार चुने जाने हेतु योग्य नहीं था।

● निर्वाचित उम्मीदवार या उसके निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसकी सहमति से, धारा 29 में निहित कोई भ्रष्ट आचरण किया गया है।

● कोई नामांकन अनुचित तौर पर खारिज कर दिए गया हो।

● किसी नामांकन की अनुचित स्वीकृति द्वारा, निर्वाचित उम्मीदवार या उसके सहयोगी अभिकर्ता ने भ्रष्ट आचरण किया हो।

● याचिकाकर्ता या किसी अन्य उम्मीदवार ने विधिमान्य मतों का बहुमत प्राप्त किया हो।

● किसी वोट को गलत या अनुचित तरीके से ग्रहण, खारिज या शून्य किया हो।

● निर्वाचन याचिका की सुनवाई में जिला न्यायाधीश ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगा और ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा, जो विहित की जाएं।  

धारा- 32

जिला न्यायाधीश के आदेशों से अपीलें

(Appeals from orders of District Judge)

● धारा-31 के अधीन दायर याचिका पर जिला न्यायधीश द्वारा दिए गए प्रत्येक आदेश पर अपील उच्च न्यायालय में होगी।  

● उच्च न्यायालय सिविल न्यायालय की प्रक्रिया का अनुसरण करेगा।

● इस धारा के तहत ‘अपील’ आदेश की दिनांक से 30 दिनों की अवधि में की जाएगी।

धारा-33

समस्त उम्मीदवारों का निर्वाचन अपास्त होने की दशा में प्रक्रिया

(Procedure where election of all candidates is set Aside)

● जब कभी किसी नगरपालिका के सभी सदस्यों का या उसके दो तिहाई (2/3) से अधिक सदस्यों का निर्वाचन धारा-31 या धारा-32 के अधीन अपील किए जाने पर शून्य घोषित कर दिए जाए, तब राज्य सरकार नगरपालिका को विघटित करेगी और उसके पश्चात धारा- 322 के उपबंध लागू होंगे।

धारा-34

आदेशों और विनिश्चय की अन्तिमता

(Finality of orders and decision)

● धारा-32 के अधीन की गई किसी अपील पर उच्च न्यायालय का निर्णय और केवल ऐसे निर्णय के अधीन रहते हुए धारा-31 के अधीन जिला न्यायधीश का आदेश अंतिम और निर्णयात्मक होगा। उच्च न्यायालय और जिला न्यायधीश के निर्णय अन्तिम होते है, यदि अपील नही की जाती है।

धारा-35

निरर्हताएं

(Disqualifications)

● निम्नलिखित में से किसी नगरपालिका की सदस्यता के लिए निरर्हताएं होंगी, अर्थात-

 1. धारा-28 में निहित निर्वाचन संबंधी अपराधों से।

 2. धारा-29 में निहित भ्रष्ट आचरणों से।

● यदि उपरोक्त निरर्हताओं से कोई उम्मीदवार दोषी ठहराया गया है तो जिला न्यायधीश द्वारा सिद्धदोष ठहराये जाने की तारीख़ से 6 वर्ष तक अयोग्यता रहेगी।

धारा-36

निरर्हता का हटाया जाना या उसकी कालावधि में कमी करना

(Removal or reduction of period of disqualification)

● राज्य निर्वाचन आयोग, धारा-35 (1-क) के अधीन किसी निरर्हता को लेखबद्ध कारणों से हटा सकेगा या ऐसी किसी भी निरर्हता की कालावधि को कम कर सकेगा।

धारा- 37

पद की शपथ

(Oath of office)

● प्रत्येक सदस्य कर्त्तव्य ग्रहण करने से पूर्व, कलेक्टर या नामनिर्देशित के समक्ष शपथ लेगा।

● नगरपालिका की प्रथम बैठक की तारीख से या उपनिर्वाचन में निर्वाचित सदस्य या मनोनीत सदस्य के मामले में क्रमश: निर्वाचन या मनोनयन की तारीख से 1 महीना की समयावधि में शपथ ग्रहण करने में विफल रहता है तो यह समझा जाएगा कि उसने अपना स्थान रिक्त कर दिए है। परंतु ऐसी समयावधि पर विचार नहीं किया जाएगा जिसके दौरान ऐसा सदस्य जेल में था।

धारा-38

त्यागपत्र

(Resignation)

● कोई सदस्य, कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा अनुप्रमाणित लिखित नोटिस अध्यक्ष को देकर अपनी सदस्यता से त्यागपत्र दे सकेगा और ऐसा त्यागपत्र नोटिस की तारीख से 15 दिवस की समाप्ति के पश्चात या अध्यक्ष द्वारा त्यागपत्र स्वीकार करने की तारीख से, जो भी पहले हो, से प्रभावी होगा।  

धारा-39

सदस्य का हटाया जाना

(Removal of member)

1. राज्य सरकार नगरपालिका के किसी सदस्य को निम्नलिखित में से किसी भी आधार पर हटा सकेगी-

● वह नगरपालिका की इजाजत के बिना तीन से अधिक लगातार साधारण बैठकों में अनुपस्थित रहा है परंतु ऐसी समयावधि पर विचार नहीं किया जाएगा जिसके दौरान सदस्य जेल में था।

● वह धारा 37 (शपथ) का पालन करने में विफल रहा है।

● उसने अपने निर्वाचन के पश्चात धारा- 14 या धारा 24 में वर्णित कोई अयोग्यता धारण कर ली है या वह धारा 21 की अपेक्षाओं को पूरा नहीं करता है।

● उसने सदस्य के रूप में अपने कर्त्तव्यों के पालन में जानबूझकर उपेक्षा की है।

● वह अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन में अवचार का दोषी रहा है।

● वह किसी निकृष्ट आचरण का दोषी रहा है।

● वह सदस्य के रूप में अपने कर्त्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हो गया है।

● वह इस एक्ट के अधीन सदस्य के रूप में चुने जाने के लिए निरर्हित हो गया है।

●  उसने सदस्य के रूप में अपनी स्थिति का दुरूपयोग किया है।

● परंतु हटाये जाने का कोई भी आदेश, राज्य सरकार द्वारा ऐसे विद्यमान या सेवानिवृत अधिकारी से (राज्य स्तरीय सेवा की रैंक) जांच के पश्चात और संबंधित सदस्य को स्पष्टीकरण का अवसर दे दिए जानें के पश्चात, पारित किया जाएगा।

2. उपधारा 1 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग, राज्य सरकार द्वारा जानकारी में आए तथ्यों के आधार पर या नगरपालिका की रिपोर्ट के आधार पर या स्वप्रेरणा से लिया जा सकता है।

● परन्तु जब तक राज्य सरकार के आदेश द्वारा सदस्य को हटा नहीं दिए जाए तब तक वह अपना पद रिक्त नहीं करेगा और वह अपनी समस्त शक्तियों का प्रयेाग और कर्त्तव्य का पालन करता रहेगा।

3. राज्य सरकार किसी सदस्य के विरुद्ध आरोप का विवरण तैयार करके उसे जिला न्यायधीश की रैंक के न्यायिक अधिकारी को जांच और निष्कर्षों के लिए भेजेगी।

4. नियुक्त न्यायिक अधिकारी संबंधित सदस्य को सुनने के बाद अपने निष्कर्षों को राज्य सरकार को भेजेगी तत्पश्चात या तो पुन: जांच के आदेश देगी या अंतिम आदेश पारित करेगी।

5. जांच की सुनवाई करते समय, न्यायिक अधिकारी ऐसे नियमों का पालन करेगा, जो राज्य सरकार प्रदत्त कराएगी तथा उसे वही शक्तियां प्राप्त होगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन किसी सिविल न्यायालय को प्राप्त होती है।

6. राज्य सरकार, ऐसे किसी सदस्य को जांच के दौरान निलंबित कर सकेगी और निलंबित सदस्य नगरपालिका की कार्रवाई में भाग नही ले सकेगा तथा कर्तव्य पालन का भी हकदार नहीं होगा।

7. राज्य सरकार का प्रत्येक अंतिम आदेश राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा और वह अन्तिम होगा और ऐसे किसी भी आदेश को किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जा सकेगा।

धारा-40

पदावधि की समाप्ति के पश्चात अभिकथनों की जांच

(Inquiry into certain allegations after expiry of term of office)

● पदावधि की समाप्ति के बाद भी राज्य सरकार लिखित आदेश द्वारा कार्य में लापरवाही या भ्रष्टाचार या कदाचार आदि की जांच कर सकती है। नगरपालिका का सदस्य ना रहने पर भी जांच की जा सकती है। यदि उम्मीदवार पुन: निर्वाचित होता है तो भी जांच जारी रखी जाएगी।

धारा-41

धारा 39 के अधीन हटाये गए सदस्यों की निर्योग्यता

(Disability of members removed under section 39)

● कोई सदस्य धारा- 39 (1)(घ) के अधीन हटाने या जिसके विरुद्ध धारा-40 के अधीन प्रतिकूल निष्कर्ष दर्ज किए गए, दर्ज किए जाने की तारीख से 6 वर्ष के लिए निर्वाचन के लिए अयोग्य घोषित कर दिए जाएगा।

धारा-42

किसी नगरपालिका में सदस्य का पद और संसद, राज्य विधानसभा या किसी पंचायतीराज संस्था की सदस्यता एक साथ धारण करने पर निर्बन्धन (रोक)

(Restriction on simultaneous holding of the office of a member in Municipality and the membership of Parliament or State Legislative Assembly or a Panchayati Raj Institution.)

● कोई भी व्यक्ति, किसी नगरपालिका का निर्वाचित या मनोनीत सदस्य और संसद या राज्य विधानमण्डल या किसी पंचायती राज संस्था का सदस्य, दोनों एक साथ नहीं रहेगा और यदि कोई ऐसा व्यक्ति है तो उसे एक जगह से त्यागपत्र देना पडेगा।

● यदि कोई व्यक्ति पहले से सांसद, विधायक या सरपंच है और बाद में वह नगरपालिका सदस्य के रूप में निर्वाचित हो जाता है तब ऐसे सदस्य के रूप में निर्वाचित होने या मनोनीत होने की तारीख से 14 दिनों की समाप्ति पर वह ऐसा सदस्य नहीं रहेगा जब तक कि वह सांसद, विधायक या सरपंच के स्थान से पहले ही त्यागपत्र नहीं दे देता परंतु यदि कोई व्यक्ति पहले से ही किसी नगरपालिका का निर्वाचित या मनोनीत सदस्य है, यदि वह सांसद, विधायक या पंचायती राज संस्था सदस्य के रूप में निर्वाचित हो जाता है तब सांसद, विधायक या पंचायत सदस्य निर्वाचित होने की तारीख से 14 दिनों की समाप्ति पर वह नगर पालिका का सदस्य नहीं रहेगा जब तक कि सांसद, विधायक या पंचायती राज संस्था सदस्य में से अपने स्थान से, पहले ही त्याग पत्र नहीं दे देता है।

धारा-43

प्रत्येक नगरपालिका में एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष होगा

(Every Municipality to have a Chairperson and a Vice-Chairperson)

पद का नामनगरपालिका बोर्डनगर परिषदनगर निगम
अध्यक्षअध्यक्षसभापतिमहापौर
उपाध्यक्षउपाध्यक्षउपसभापतिउपमहापौर

● नगरपालिकाओं के अध्यक्ष के पद एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे।

●  राज्य सरकार आरक्षित अध्यक्ष पदों का आवंटन करने में निम्नलिखित उपबंध अपनाएगी-  

● एससी या एसटी के लिए पद का आरक्षण वहाँ होगा, जहां राज्य में उनकी जनसंख्या तुलनात्मक रूप से अधिक हो।

● महिलाओं के लिए पद आरक्षण का फैलाव सम्पूर्ण राज्य में होगा।

● इस धारा के अधीन एससी, एसटी, ओबीसी वर्गों के सदस्यों के लिए अध्यक्षों के पद का आरक्षण भारत के संविधान के अनुच्छेद-334 में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति पर प्रभावी नहीं रहेगा।

● नगरपालिका का अध्यक्ष, उपाध्यक्ष यदि 30 दिन से अधिक अनुपस्थित रहता है या वह अपने कर्त्तव्यों के पालन में असमर्थ रहता है तो वह पद पर नहीं रहेगा।

● अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की 6 महीने से अधिक की छुट्‌टी मंजूर नहीं की जाएगी।

● उपाध्यक्ष, अध्यक्ष को नोटिस देकर त्यागपत्र दे सकता है जबकि अध्यक्ष त्यागपत्र उस अधिकारी को देता है जो राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत हो।

● अध्यक्ष पद की पदावधि समाप्त होने पर 6 माह में निर्वाचन होगा, राज्य सरकार अपरिहार्य परिस्थितियों में अधिकतम 3 माह और बढ़ा सकेगी।

● अध्यक्ष नगरपालिका निधि से मासिक भत्ते एवं प्रसुविधाएं प्राप्त करेंगे।

धारा-44

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्वाचन की विधि मान्यता का अवधारण

(Determination of validity of election of Chairperson or Vice-Chairperson)

● अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के निर्वाचन संबंधी विवाद जिला न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा (किसी और के समक्ष नहीं)। जिला न्यायाधीश भी इस एक्ट के अधीन निर्णय देगा। याचिका केवल ऐसे उम्मीदवार की स्वीकार की जाएगी जो हार गया है या उसका नामांकन रद्द हो गया है। निर्वाचन याचिका 1000 रु. के साथ प्रस्तुत की जाएगी। याचिका सुनवाई में न्यायधीश ऐसी रीति का प्रयोग करेगा जो विहित की जाए।

धारा- 45

मुख्य नगरपालिका कृत्य

(Core municipal functions)

● प्रत्येक नगरपालिका का कर्त्तव्य, अपने नगरपालिका क्षेत्र में-  स्वास्थ्य, स्वच्छता, संरक्षण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जल निकास, मल वहन, सभी लोक न्यूसेंसों को समाप्त करना, रोशनी व्यवस्था, आग बुझाना, संपत्ति की सुरक्षा, खतरनाक व्यापारों को विनियमित करना, सार्वजनिक मार्गों, स्थानों की बाधाएं हटाना, खतरनाक भवनों को सुरक्षित करना, मृतकों या मृत जानवरों के शवों को ले जाना। मार्गों, पुलिया, बाजारों, पेयजल स्त्रोत, नालियों का संरक्षण करना। शौचालयों, मूत्रालयों का निर्माण। जन्म-मृत्यु पंजीकरण, कुत्तों को पकड़ना (धारा- 249 के अधीन)। नगरीय संपत्ति की सुरक्षा के लिए पुलिस अधिकारियों का भुगतान करना। कूड़ा-करकट से कम्पोस्ट खाद्य तैयार करना। कांजी हाउस स्थापित करना। जनसंख्या नियंत्रण, परिवार कल्याण को बढावा। आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करना। सड़कों, फुटपाथों, राहगीर रास्तों, आन्तरिक जल परिवहन प्रणाली स्थापित करना। पार्किंग,बस स्टोप की व्यवस्था करना। मानव बस्ती के लिए योजना तैयार करना। नगरीय क्षेत्र का सौन्दर्यीकरण करना। समुदाय के महत्त्वपूर्ण आंकडे़ और सांख्यकी का संग्रह करना। शैक्षणिक, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढावा देना। नगरपालिका वित्त एवं उसके विकास कार्य की सूचना जनता को प्रकट करना। पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण करना।

धारा-46

अन्य नगरपालिका कृत्य

(Other municipal functions)

● नगरपालिका अपने मुख्य कृत्यों, जो नगरपालिका निधि पर प्रथम प्रभार होंगे उनके अच्छे निष्पादन के अलावा निम्न अन्य कृत्यों का जिम्मा ले सकेगी-

 1.  पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र में – बंजर भूमियों को उपजाऊ बनाना, सामाजिक वानिकी, पौधशालाओं की स्थापना एवं रखरखाव, जनसहभागिता के माध्यम से हरियाली की वृद्धि, पुष्प प्रदर्शनी, फूल उगाने एवं प्रदूषण निवारण को प्रोत्साहन करना।

 2. लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता क्षेत्र में- संक्रामक बीमारियों के उन्मूलन, टीकाकरण अभियान, सार्वजनिक तालाब, कुआँ रखरखाव, प्रवचन सेमीनारों के माध्यम से लोक स्वास्थ्य और नागरिक चेतना का प्रोत्साहन करना।

 3. शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में – नागरिक, प्रोढ़ और सामाजिक शिक्षा का बढ़ावा देना। संगीत, शारीरिक शिक्षा, खेलकूद, थियेटर को बढावा देना। नगरीय जीवन में सांइस टेक को अपनाना। नगरपालिका में पत्रिकाएं पुस्तकें, मैंगजीन उपलब्ध कराना। मूर्तियां एवं चित्र तस्वीर स्थापित करना। ऐतिहासिक एवं कलात्मक स्मारकों का रखरखाव। सार्वजनिक पुस्तकालयों, संग्रहालय, वाचनालय, पागलखाने एवं सभा भवन की स्थापना और रखरखाव करना।

 4. लोक कल्याण क्षेत्र में- सूखा, भूकम्प एवं आपदा में राहत प्रदान करना। अस्पतालों, औषद्यालयों, आश्रयों, प्रसूतिगृहों एवं बाल कल्याण केन्द्र का निर्माण और रखरखाव करना। बेघरों के लिए आश्रय स्थापित करना। हाथसफाई कर्मियों का पुनर्वास करना। सामुदायिक कल्याण के लिए स्वैच्छिक श्रम संगठन की व्यवस्था करना। ऐसी सूचना का प्रसार करना जो लोक कल्याणकारी हो।

 5. सामुदायिक संबंधों के क्षेत्र में- विशिष्ट व्यक्तियों को नागरिक सम्मान प्रदान करना। ख्याति प्राप्त व्यक्तियों की मृत्यु पर श्रद्धांजलि देना। मेलों एवं प्रदर्शनी का आयोजन करना। लोकहित की सूचना का प्रसार करना।

धारा-47

सरकार द्वारा समनुदेशित कृत्य/ सरकार द्वारा सौपें गए कार्य

(Functions assigned by the Government)

● राज्य सरकार साधारण, विशेष आदेश द्वारा किसी नगरपालिका को अन्य नगरपालिक कार्य सौंप सकती है, जिनका पालन किया जाना आवश्यक है।

धारा-48

अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के कृत्य

(Functions of Chairperson and Vice-Chairperson)

v  अध्यक्ष के निम्न कर्तव्य होंगे-  

● धारा- 58 के अधीन नगरपालिका की नियमित बैठकें आयोजित करना।

● समस्त बैठकों की अध्यक्षता करना।

● धारा- 337(2) के अधीन कार्य संचालन करना।

 ● वित्तीय एवं कार्यपालक प्रशासन पर निगरानी करना।

● उपाध्यक्ष के वही कार्य होंगे, जो अध्यक्ष समय-समय पर प्रत्यायोजित करें।

● अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष बैठकों की अध्यक्षता करता है तथा उसकी शक्ति का प्रयोग करता है।  

धारा- 49

अभिलेखों की अभिरक्षा को सम्मिलित करते हुए मुख्य नगरपालिका अधिकारी की शक्तियां और कर्त्तव्य

(Powers and duties of the Chief Municipal Officer including custody of records)

1. मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नगरपालिका के सभी अभिलेखों की सुरक्षा हेतु उत्तरदायी है।

2. यदि नगरपालिका या उसकी समिति की कोई कार्यवाही या संकल्प, अध्यक्ष का आदेश इस अधिनियम के असंगत हो तो मुख्य नगरपालिका अधिकारी विधि के अनुसार नगरपालिक या समिति या अध्यक्ष को सलाह दे और उस टिप्पणी को अभिलिखित करे। यदि यह अधिनियम के अनुसार नहीं है तो 7 दिन के भीतर रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजें।

3. यदि उपधारा (2) के अधीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी कर्त्तव्यों की उपेक्षा करता है तो उस हानि के लिए व्यक्तिश: जिम्मेदार होगा, उस हानि को उसी  रीति से वसूल की जाएगी जिस प्रकार नगरपालिका बकाया वसूल की जाती है।

4. उपधारा (2) के अधीन रिपोर्ट का परीक्षण सरकार करेगी और अंतिम आदेश देगी जो नगरपालिका पर बाध्यकर होगा। यदि 30 दिन के भीतर आदेश पारित न हो तो ऐसा माना जाएगा कि टिप्पणी नहीं की गई।

5. अधिप्रमाणित करने का अधिकार केवल मुख्य नगरपालिका अधिकारी के पास होगा।

6. नगरपालिका को संबंधित एवं समस्त पत्राचार साधारणतया मुख्य नगरपालिका अधिकारी के नाम से भेजा जाएगा किन्तु अध्यक्ष को भी भेजा जा सकता है। नगरपालिका की तरफ से जारी पत्राचार साधारणतया मुख्य नगरपालिका अधिकारी की मुहर व हस्ताक्षर से जारी होगा और अध्यक्ष की मुहर और हस्ताक्षर से भी जारी किया जा सकता है।

v मुख्य नगरपालिका अधिकारी-

1. नगरपालिका के लेखाओं की संपरीक्षा में आयी त्रुटि को हटाने हेतु तुरंत कदम उठाएगा।

2. उसकी बैठक में विचाराधीन किसी विषय के संबंध में स्पष्टीकरण देगा, किन्तु उस पर मतदान नहीं करेगा या कोई प्रस्थापन नही करेगा।

3. नगरपालिका की धन/ संपत्ति के संबंध में कपट, गबन, चोरी या हानि के सभी मामलों की रिपोर्ट नगरपालिका को करेगा।

4. नगरपालिका की नीतियों एवं निर्देशों को यदि इस अधिनियम से असंगत न हो, को क्रियान्वित करेगा, सभी कार्यों एवं विकास योजनाओं का त्वरित निष्पादन करेगा।

5. अध्यक्ष के सामान्य अधीक्षण और नियंत्रण के अधीन रहते हुए, अपने अधीनस्थ नगरपालिका के अधिकारियों और सेवको का अधीक्षण और नियंत्रण करेगा।

धारा-50

कार्यभार सौंपना

(Handing over charge)

● जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष या सदस्य त्यागपत्र दे दे या उन्हें पद से हटा दे या पद रिक्त कर दे या निलम्बित कर दे या उनका निर्वाचन शून्य घोषित कर दे, तो अपना कार्यभार निम्नलिखित तरीके से अन्य को सौंपेगें-

 1. अध्यक्ष अपना कार्यभार उपाध्यक्ष को सौंपेगा, यदि उपाध्यक्ष नहीं है तो सदस्य को सौंपेगा जो कि सरकार निर्धारित करेगी। यदि एससी, एसटी, ओबीसी एवं महिला वर्ग से अध्यक्ष है तो इन्हीं वर्गों के प्रतिनिधियों को सौंपा जाएगा।

 2. उपाध्यक्ष अपना कार्यभार अध्यक्ष को सौंपेगा, यदि अध्यक्ष अनुपस्थित है तो सदस्य को सौंपेगा जो सरकार निर्धारित करेगी।

 3. सदस्य अपना कार्यभार अध्यक्ष को सौंपेगा यदि अध्यक्ष अनुपस्थित है तो उपाध्यक्ष को सौंपेगा।

 4. विघटित या अन्यथा निष्क्रिय हुई नगरपालिका की दशा में, नवगठित नगरपालिका को या यथास्थिति, धारा-322 के अधीन नियुक्त अधिकारी को कार्यभार सौंपेगा।

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